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Saturday, June 19, 2021

फ्लाइंग सिख कहे जाने वाले मिल्खा सिंह जी का निधन हो गया

 फ्लाइंग सिख कहे जाने वाले मिल्खा सिंह जी का निधन हो गया।


सबसे बड़ी दुखद खबर भारत के लिए फ्लाइंग सिख कहे जाने वाले मिल्खा सिंह की कल रात को निधन हो गया। मीका सिंह के निधन के समय उनकी उम्र 91 वर्ष थी।मिल्खा सिंह की तबीयत बहुत खराब थी वह हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे उन्हें भी कोणासन का मन हुआ था इसी कारण उनके दिन पर दिन उनकी ऑक्सीजन लेवल कम हो जा रही थी जिसके वजह से कल रात को मिल्खा सिंह की निधन हो गई।

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 फ्लाइंग सिख कहे जाने वाले मिल्खा सिंह जी का निधन हो गया।



Corona से हुई थी मिल्खा सिंह की मौत


हफ्ते भर पहले ही इस महामारी के वजह से उन्हें अपने पत्नी को भी खोना पड़ा था।उन लोगों के यहां लग रहा था कि मिल्खा सिंह इस corona से जीतकर सही सलामत अपने घर आ जाएंगे।हालांकि मिल्खा सिंह दो बार ठीक होकर अस्पताल से घर भी आए थे।लेकिन गुरुवार को बुखार होने के कारण और उनके ऑक्सीजन लेवल के कमी के कारण उनके तबीयत बहुत खराब होने लगी थी और गुरुवार की देर रात उनका निधन हो गया।

सूत्रों से पता चला है कि मिल्खा सिंह की तबीयत बहुत दिनों से खराब थी वह हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे और मिल्खा सिंह को coron संक्रमण था इसीलिए उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और उन्हें बुखार आ रहा था इसी वजह से उनकी तबीयत और भी खराब होने लगी और उनकी सांस लेने की क्षमता भी कम होने लगी थी थोड़ा संक्रमण के चलते इसीलिए उनका निधन हो गया सांस लेने की क्षमता कम होने से।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिल्खा सिंह के निधन पर दुख जताया।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लिखा कि हमने भारत के महान खिलाड़ी मिल्खा सिंह को खो दिया। मिल्खा सिंह ने अपने व्यक्तित्व से लोगों को बहुत मोटिवेट किया और इसी वजह से लोगों के दिल में मिल्खा सिंह ने एक अच्छी जगह बनाई हुई थी।

मैं मिल्खा सिंह जी के निधन पर बहुत ही दुखी हूं।


Milkha Singh ने नया रिकॉर्ड भी बनाया


80 मै से 77 दौड़े मिल्खा सिंह ने जीते थे। किसी दौड़ को जीतने के बाद मिल्खा सिंह ने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया था। 1960 में ओलंपिक मेडल अपने नाम पर ना करने के कारण वह मन ही मन में बहुत दुखी भी थे। जब वह पंजाब में स्पोर्ट्स डायरेक्टर में तैनात रहे थे तब उन्होंने एक बात सब से कही थी कि मैं चाहता हूं कि कोई हिंदुस्तानी जो ओलंपिक में अपना नाम बनाए और ओलंपिक मेडल अपने नाम पर करें और पूरी दुनिया भर में इंडिया का नाम रोशन करें। और भारत का झंडा शान से ओलंपिक में लहरा के आए।

नहीं रहे फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह


करीब 1 महीने से corona से लड़ने के बाद चंडीगढ़ के पीजीआई हॉस्पिटल में फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह ने आखिरी सांस ली।91 साल की उम्र में भी मिल्खा सिंह ने दुनियाभर में जितने भी नौजवान एथलेटिक्स थे उनको भी पछाड़ कर पूरे भारतवर्ष के नौजवान को एक नई रास्ता दिखाने की कोशिश भी की जिसके बाद हिंदुस्तान के ना जाने कितने नए नौजवान इस एथलेटिक्स में आए और उनका यह सपना पूरा करने के लिए अपनी हर एक जुनून को दांव पर लगाने के लिए तैयार हैं।


हिंदुस्तान के पहले ऐसे एथलेटिक थे मिल्खा सिंह जिन्होंने कॉमनवेल्थ games में हिंदुस्तान को गोल्ड मेडल दिलवाया था। भारत का झंडा पूरे विश्व में लहराया था


साल 1958 के एशियन गेम्स की 200 और 400 मीटर रेस में गोल्ड जीता था मिल्खा सिंह ने उसके साथ ही साथ सो साठ के रोम ओलंपिक में चौथे पायदान पर अपना मुकाम हासिल किया था।

मिल्खा सिंह की सबसे बड़ी बात यह है कि उनके नेशनल रिकॉर्ड को चार दशक तक कोई छू तक नहीं सका ना ही उनको कोई पछाड़ सका एथलेटिक्स में।


मिल्खा सिंह के चाहने वालों में शोक की लहर


भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने मिल्खा सिंह जी के निधन पर शोक जताया।

लिखा सर के निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ दिल को दुख लगा अफसोस हुआ हम जानते हैं कि सिंह जी की कंट्रीब्यूशन देश के लिए बहुत ज्यादा थी। मीका सिंह जी  स्पोर्ट्स जगत के हीरे थे।मिल्खा सिंह जी ने हमें आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट किया हमारे साथ रहें और हमें कभी भी गम महसूस होने नहीं दिया इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद कहता हूं। मैं गुरु से प्रार्थना करूंगा कि आप जहां पर भी हो वहां से मुझे आशीर्वाद देते रहें।


जब मिल्खा सिंह जी की निधन हुई थी तब लोगों ने अपने आंसू को रोकना चाहा पर उन्होंने रोक नहीं सके।

क्योंकि मिलकर सिंह जी ने एथलेटिक्स में भारत को ऐसा सम्मान दिया है जो कि हर किसी के बस की बात नहीं है। मिल्खा सिंह जी ने खाली पेट और नंगे पैरों में एथलेटिक्स जीतकर पूरी दुनिया को यह साबित कर दिया कि अगर ऐसो आराम नाभि हो तो हम पूरे दुनिया भर में अपना नाम बना सकते हैं और हमारे देश को पूरे दुनिया भर में प्रसिद्ध कर सकते हैं और पूरे दुनिया को यह बता सकते हैं कि हमारा भारतवर्ष किसी से कम नहीं है।


1960 में जनरलाइफ खान ने मिल्खा सिंह जी को फ्लाइंग सिख की उपाधि दी।


आपको यह बात जानकर बहुत ही हैरानी होगी मिल्खा सिंह पहले पाकिस्तान के शरणार्थी थे उसके बाद जब उन्होंने भारत में कदम रखा। तब उन्होंने खूब जी जान लगाकर भारत को दुनिया भर में प्रसिद्ध करने के लिए अपने आप को एथलेटिक्स में झोंक दिया।

बाद में पाकिस्तान ने मिल्खा सिंह जी को अपने सिर आंखों पर बिठाया और उसके बाद 1960 में जनरल अयूब खान ने मिल्खा सिंह जी को फ्लाइंग सिख की उपाधि दी


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