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Saturday, February 13, 2021

महिला दिवस कब लागू हुआ? कैसे महिला दिवस को मनाने के लिए? Women's Day क्यों मनाया जाता है?

 महिला दिवस कब लागू हुआ?कैसे महिला दिवस को मनाने के लिए?Women's Day क्यों मनाया जाता है?


महिला दिवस कब लागू हुआ?

आज हम बात करने वाले हैं (international women's day)के बारे में या फिर आप बोल सकते हैं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में। जो कि 8 मार्च को मनाया जाता है।

महिला दिवस कब लागू हुआ? कैसे महिला दिवस को मनाने के लिए? Women's Day क्यों मनाया जाता है?When did women's day started in India?  Why do we celebrate Women's Day on March 8? Which day we are celebrating Women's Day? What is the theme of Womens Day 2021?


क्या आपको पता है कि यह (international women's day) दिवस क्यों मनाया जाता है। जब मैंने कुछ आदमी से पूछा कि यह

international women's day क्यों मनाया जाता है।

तो उन्होंने कहा कि जैसे हम वैलेंटाइन डे मनाते हैं या फिर फादर्स डे मदर्स डे मनाते हैं उसी तरह इसे भी मना लेते हैं। जब इसे लागू कर दिया गया है तो इसलिए हम भी मना लेते हैं। लेकिन इसकी वास्तविकता और इसकी सच्चाई काफी ज्यादा  गहरी है। वास्तविकता क्या है आज हम आपको बताएंगे तो आप सही से पढ़ते रहें इसी वास्तविकता और सच्चाई क्या है और इसके पीछे छुपे सारे राज क्या है। वास्तविकता यह है कि आज से डेढ़ सौ साल पहले महिलाओं के पास जो (Fundamental Right!)फंडामेंटल राइट है इसके बारे में हम सोचते तक नहीं है। महिलाओं के पास इलेक्शन में खड़े होने का और बाहर काम करने का या फिर नौकरी करने का और यहां तक की बच्चा पैदा करने हैं कि नहीं यह सब भी राइट नहीं थे। हम सिर्फ इंडिया की बात नहीं कर रहे हैं। यह सारी दुनिया में जैसे अमरीका इंग्लैंड यूरोप सभी देश में महिला के लिए अधिकार नहीं था। सबसे पहले बात करे तो महिलाओं की तो नौकरी करना ही माना था। उन्हें नौकरी करने का अधिकार ही नहीं था। और ना ही किसी नौकरी में महिलाएं के लिए कोई पद था। महिलाओं को नौकरी करना शोभा नहीं माना जाता था इस समय । इसीलिए महिलाओं को नौकरी करने में बाधा दिया जाता था। और उन्हें नौकरी करने के लिए कोई उत्साहित भी नहीं करता था। हालांकि इस समय में यह सब बिल्कुल ना के बराबर है। क्योंकि उन्होंने खुलकर उस समय इसका प्रदर्शन किया था पोस्ट ऑफिस पर रोक लगाने के लिए पाबंदी की गई थी। उन्होंने पूरी तरह से इसका प्रोटेस्ट (protest)किया था। तब जाकर आज यह दिन देखना पड़ रहा है कि महिलाएं नौकरी कर रही है। और महिलाएं बहुत उच्च पद में नौकरी कर रही है लड़के के बराबर। आज भी बहुत ऐसे लोग हैं जो लड़की को नौकरी में भेजना नहीं चाहते। या फिर उनका यह मानना है कि घर की लड़की को नौकरी नहीं करना चाहिए। यह किस हद तक सही है यह तो हम नहीं बता सकते। या फिर इसकी वजह और भी हो सकती है। क्योंकि अभी भी देखा जाए तो महिलाएं या फिर बेटियां इतनी भी सुरक्षित नहीं है जितना होना चाहिए था उनको । क्योंकि अभी जब कोई लड़की रात को देर से घर पहुंचती है तो मां-बाप की चेन नींद सब खो जाती है। मां बाप को और परिवार परिजनों को यह डर समय लगा रहता है कि उनके लड़की के साथ कुछ बुरा ना हो जाए। जिसके चलते उनकी लड़की को आगे जाकर बहुत सारी परेशानी का सामना करना पड़े। 


महिलाओं को आगे के समय में पुरुषों के समान कभी माना नहीं जाता था। क्योंकि ऐसा था कि जब कोई पुरुष एक काम अच्छी तरह से कर रहा है और उसे अगर ₹500 तनख्वाह दी जाती थी तो। उसी काम को अगर कोई लड़की सही तरह से कर लेती थी तो उसी लड़की को एक सौ रुपया तनखा दी जाती थी। यानी कि महिलाओं को पुरुषों के समान कभी समझा नहीं गया था। यह बड़ी विचित्र बात थी कि ऐसा क्यों किया जाता था आगे के समय मैं। लेकिन जब आप इस समय में देखेंगे तो हर एक लड़का लड़की एक समान नजर से देखी जाती है। मेरे लिए तो यह बहुत अच्छी बात है।


उसके अलावा यही नहीं था । महिलाओं को इलेक्शन में खड़ा होना माना था या फिर खड़ा होने से उन्हें रोका जाता था। उनको यहां तक भी अधिकार नहीं था कि उनको बच्चा कब पैदा करना है। बच्चा पैदा करने का अधिकार पुरुषों के द्वारा की जाती थी कि महिलाएं कब बच्चा पैदा होंगे। यहां तक की उनको अपने पैतृक संपत्ति में भी कुछ नहीं मिलता था। इसकी वजह से घरेलू हिंसा होती थी। घर घर में झगड़ा होता था मारकाट होती थी। और महिलाओं को टॉर्चर (torture) तक भी किया जाता था। यह साड़ी अधिकार पाने के लिए महिलाएं ने मोर्चा भी निकाला प्रदर्शन भी किए और धरना भी किया।1909 फरवरी मार्च के महीने में कुछ महिला ने पहली बार प्रदर्शन किया कि हमें समान अधिकार चाहिए। हमें पुरुषों से बराबर समझा जाए, हमें इलेक्शन में खड़ा होने के लिए अधिकार चाहिए, हमें नौकरी करने के लिए भी अधिकार चाहिए, हमें वह सब अधिकार चाहिए जो महिलाओं के लिए दरकार है. यह मोर्चा इतना अच्छा प्रदर्शन किया की साड़ी जगह के महिलाओं ने इस प्रदर्शन में साथ निभाया। उसके बाद धीरे-धीरे सारे देश में और सारे राज्य में प्रदर्शन करना चालू हो गया. इस प्रदर्शन में कहीं महिलाएं घातक रूप से घायल हो गए हैं., कहीं की तो जान चली गई, बहुत सारे महिलाएं इस प्रदर्शन में मारधाड़ के कारण विकलांग भी हो गई, और भी बहुत घटना हुई थी इस प्रदर्शन के समय. के बाद धीरे धीरे सब पुरुषों को और महिलाओं को समझ में आया कि महिलाएं ने जो परेशान की है यह सच में काबिले तारीफ है। और इन्हें धीरे-धीरे यह अधिकार मिलना शुरू हो गया। लेकिन आप आज भी देखेंगे कि कहीं जगह पर महिलाओं को आज भी पुरुषों के समान नहीं समझा जाता है. उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं दिया जाता है. उनके ऊपर आज भी अत्याचार होती है. अगर आप बात करें तो इंडिया की जो सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अगर किसी के घर में लड़की पैदा होती है तो उसे कोख में ही मार दिया जाता है वाह यह मेरा इंडिया नहीं तो क्या है.

इसके बाद हर देश international women's day के बारे में सोचने लगा और इसके बारे में समर्थन किया तब जाकर हर देश में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए पॉलिसी बनाई तो यूनाइटेड नेशन ने 8 मार्च को (8 march)इंटरनेशनल वूमेंस डे international women's day) डिक्लेयर्ड किया|उन महिलाओं को याद करने के लिए जिसने इस दौरान अपने आप को मौत के हवाले कर दिया, उन महिलाओं को जिन्होंने इस हक के लिए विकलांग हो गई, उन महिलाओं को जिन्होंने इस अधिकार के लिए बहुत सारी यातना दुख और कष्ट सहा है। जिसके वजह से आज महिलाएं और पुरुष को सामान देखा जाता है। वह अब नौकरी कर पाते हैं अपने परिवार को पालने के लिए, वह अब मतदान कर सकते हैं देश के प्रधानमंत्री या फिर नेता या फिर मुख्यमंत्री चुनने के लिए, उसको सेलिब्रेट करने के लिए यह अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। मैं एक बात कहना चाहता हूं सभी पुरुषों के लिए अगर आप भी इन महिलाओं के लिए एक कदम बनाएंगे तो हो सके यह महिलाएं भी आगे जाकर बहुत कुछ कर सकती हैं जो एक पुरुष नहीं कर सकता। अगर पूरा पुरुष समाज यह ठान ले की किसी भी हाल में महिलाओं को इज्जत देना है या फिर उनकी मदद करना है तो यह हमारा हिंदुस्तान कहां से कहां चल जाएगा आपको पता भी नहीं चल पाएगा। अगर आप यह सोचेंगे की महिलाएं तो हमारी पैर की नीचे रहती है तो आप पुरुष नहीं आप एक जानवर के लाएंगे शायद जानवर भी आप से बेहतर होगा आप तो हैवान के दर्जे पर गिने जाएंगे।

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